परोपकार के लिए दूसरों को प्रेरित करने का आपको अधिकार तभी है जब आप स्वयं वैसा कर रहे हों

You have the right to inspire others for doing charity only when you are also doing that




अधिकतर लोग समाज में ऐसे मिल जाएंगे जो परोपकार और सेवा हेतु प्रवचन तो खूब देते हैं किंतु खुद उन पर अमल नहीं करते।

ऐसे लोग चाहते तो हैं कि नेकी के कार्य हों लेकिन इसके लिये उन्हें तकलीफ न सहना पड़े और दूसरे उनके कहने से अच्छे कार्य करें।


परिणामस्वरूप धूमधाम से शुरू होने के बाद में या तो हौसला कमजोर पड़ जाता है या फिर काम दिशाहीन हो जाता है।


इसके उलट जो लोग स्वप्रेरणा से अच्छा कार्य प्रारम्भ करते हैं तो अन्य लोग भी उन्हें आदर्श मानकर उनका अनुसरण करने लगते हैं।


अप्रैल 2013 में जबलपुर (मप्र) में स्थापित विराट हॉस्पिस एक ऐसा ही प्रकल्प है जिसे साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने आत्मप्रेरणा से प्रारम्भ किया । कैंसर की अंतिम अवस्था के मरीजों की अंतिम क्षण तक निःस्वार्थ सेवा करना इस संस्थान का उद्देश्य है ।


दीदी के साथ रहने वाली एक आदिवासी युवती को कैंसर हो गया था । दीदी ने उसका हरसम्भव इलाज करवाया किन्तु उसके बावजूद वह चल बसी।


उसका पीड़ादायक अंत देखकर दीदी के मन में ऐसे मरीजों की सेवा - सुश्रुषा का विचार आया किन्तु बजाय उपदेश देने के उन्होंने स्वयं इसकी पहल की और इस तरह विराट हॉस्पिस की नींव पड़ी।


अपने गुरुदेव ब्रह्मर्षि विश्वात्मा बावरा जी महाराज की प्रेरणा से पीड़ित मानवता की सेवा के इस प्रयास को प्रारंभ करने के लिए उन्होंने साहस के साथ कदम बढ़ाए ।


उनकी वह कोशिश रंग लाई और आज विराट हॉस्पिस देश विदेश में कैंसर रोगियों की सेवा का प्रतीक बन चुका है।


उनसे प्रेरणा लेकर अन्य सेवाभावी लोग भी इस प्रकल्प से जुड़ते चले गए।


सबसे बड़ी बात ये है कि यह संस्थान बिना सरकारी सहायता लिए समाज के सहयोग से संचालित होता है।


भेड़ाघाट के समीप गोपालपुर ग्राम में इसका अपना सर्वसुविधायुक्त भवन है जिसमें 28 मरीजों की व्यवस्था है। तीन एकड़ में फैला यह विशाल परिसर भी जनसहयोग का ही सुपरिणाम है । निकट भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर 48 बिस्तरों तक किये जाने के प्रयास चल रहे हैं। साथ ही रेडियेशन की व्यवस्था भी की जाएगी।


विराट हॉस्पिस कैन्सर की अंतिम अवस्था के मरीजों को 24 घण्टे नर्सिंग सुविधा, चिकित्सा,दवाइयां देने के साथ एक परिजन सहित रहने और भोजन की सुविधा प्रदान कर रहा है। किसी भी सेवा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।


अभी तक 1041कैंसर मरीजों की आख़िरी साँस तक सेवा की जा चुकी है।

इस नेक कार्य से जुड़कर पीड़ित मानवता की सेवा करने के इच्छुक सज्जनों का विराट हॉस्पिस में स्वागत है बशर्ते इसमें उनकी मानसिक भागीदारी भी रहे।

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