महानता बड़ी-बड़ी बातें करने में नहीं बल्कि बड़े - बड़े काम करने में है।

Greatness is not in talking big things, but to do the big work




बात विचारणीय है । सच्चाई ये है कि अधिकतर लोग बातें तो बड़ी - बड़ी करते हैं किंतु उनको कार्यरूप में बदलने को लेकर उतना प्रयास नहीं करते। जबकि बुद्धिमानी केवल बातें करने से नहीं अपितु उन बातों को ज़मीन पर उतारने से ही व्यक्त होती है ।


आशय मात्र इतना ही है कि सच्चे साधक श्रेष्ठ बातें करने की बजाय श्रेष्ठ कार्य करने में अपनी शक्ति , समय और संसाधन का उपयोग करते हैं।


उक्त संदेश पर अमल करने का सबसे अच्छा उदाहरण जबलपुर (मप्र) में कार्यरत विराट हॉस्पिस नामक संस्थान है जिसकी स्थापना वर्ष 2013 में साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी द्वारा की गई ।


अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन ब्रह्मर्षि विश्वात्मा बावरा जी महाराज से प्राप्त प्रेरणा से उनके मन में जो बातें आईं उन्होंने उसे कार्य में बदलते हुए अपना जीवन कैंसर की अंतिम अवस्था में पहुंच चुके मरीजों की सेवा के लिए ही समर्पित कर दिया।


नगर के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डा.अखिलेश गुमाश्ता भी बड़ी बड़ी बातें करने की बजाय इस सेवा कार्य में दीदी के प्रमुख सहयोगी बने और नित्यप्रति अपनी सेवाएं विराट हॉस्पिस के मरीजों को निःशुल्क प्रदान कर रहे हैं।


कार्य की पवित्रता और नेक उद्देश्य की वजह से धीरे-धीरे बड़ी संख्या में सेवाभावी सज्जन इस प्रकल्प से बतौर सहयोगी जुड़ते चले गए।


विगत 6 वर्षों में 1000 से अधिक कैंसर मरीज विराट हॉस्पिस की सेवाएं प्राप्त कर चुके हैं।


आम तौर पर कैंसर मरीजों के बारे में ये धारणा बन जाती है कि उनकी मृत्यु सुनिश्चित है लेकिन दीदी ने अद्वितीय धैर्य और हौसले का परिचय देते हुए इन मरीजों की अंतिम सांस तक सेवा-सुश्रुषा के विचार को वास्तविकता में बदलकर दिखा दिया।


28 बिस्तरों की क्षमतायुक्त विराट हॉस्पिस में मरीजों को 24 घंटे नर्सिंग सेवा , जरूरी चिकित्सा, डॉक्टरी देखरेख और एक सहयोगी सहित आवास तथा भोजन का प्रबंध पूरी तरह निःशुल्क किया जाता है।


बिना कोई सरकारी सहायता लिए इसका संचालन समाज के सहयोग से हो रहा है।


जबलपुर के निकट भेड़ाघाट क्षेत्र के गोपालपुर ग्राम में जनता के सहयोग से तीन एकड़ भूमि पर सर्वसुविधाजनक अत्याधुनिक भवन का निर्माण किया गया है। इस परिसर का प्राकृतिक वातावरण बेहद रमणीक और प्रदूषण रहित है। शीघ्र ही यहां 48 बिस्तरों की व्यवस्था की जावेगी ।


किसी नेक विचार को अमल में लाने का यह प्रयास स्वार्थपरता के इस दौर में आश्चर्यचकित करने के बाद भी अनुकरणीय है।


जो महानुभाव अपने श्रेष्ठ विचारों को कैंसर मरीजों की निःस्वार्थ सेवा में परिवर्तित करना चाहते हों वे विराट हॉस्पिस में सहयोगी बन सकते हैं।


लेकिन महज आर्थिक सहायता ही पर्याप्त नहीं अपितु उसके साथ मानसिक समर्पण भी उतना ही आवश्यक है जिसके बिना कोई भी सेवा अर्थ खो देती है।


आशा है आप पीड़ित मानवता की सेवा के इस अनुष्ठान को सम्बल प्रदान करेंगे ।

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