विजेता कभी हार नहीं मानते, हार मानने वाले कभी विजेता नहीं बनते

Winner never Quit, Quitters never win



हालात बेशक बदलते रहते हैं लेकिन विजेता वही है जो मुश्किल राह पर चलकर भी लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं डरता ।



उक्त विचार से प्रेरित होकर जबलपुर (मप्र) में विराट हास्पिस नामक एक संस्थान प्रारम्भ हुआ जहां ऐसे कैंसर मरीजों का हौसला बढाने की कोशिश की जाती है जिन्हें चिकित्सक भी जवाब दे देते हैं ।


साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन ब्रह्मर्षि विश्वात्मा बावरा जी महाराज की दिव्य प्रेरणा से इसकी स्थापना की । उन मरीजों के पास जितनी भी ज़िन्दगी शेष होती है उसे खुशनुमा रखने की कोशिश विराट हास्पिस करता है।


बिना किसी भी तरह की सरकारी मदद लिए सामाजिक सहयोग से संचालित इस संस्थान में कैंसर मरीजों को पारिवारिक माहौल में रखा जाता है। फिलहाल यहां 28 बिस्तरों का प्रबंध है ।


निकट भविष्य में इसकी क्षमता 48 बिस्तरों तक बढ़ाने की योजना पर कार्य चल रहा है ।इसके अलावा रेडिएशन इकाई स्थापित किये जाने की भी तैयारी चल रही है ।


विराट हास्पिस में मरीजों के लिए हर समय प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध रहता है। जरूरी दवाइयाँ और डाक्टरी सलाह के अतिरिक्त उनके एक सहयोगी सहित भोजन और आवास का प्रबन्ध भी है।


उक्त सभी सुविधाऐं पूरी तरह निःशुल्क हैं।


विराट हॉस्पिस मरीजों को प्रसन्नचित्त रखते हुए सामान्य जीवन व्यतीत करने हेतु प्रेरित करता है जिससे उनकी निराशा दूर होती है । अब तक 1040 से अधिक मरीजों की अंतिम सांस तक सेवा विराट हॉस्पिस कर चुका है।


विराट हॉस्पिस को अत्याधुनिक स्वरूप प्रदान करने का लक्ष्य जन सहयोग से हासिल करते हुए भेड़ाघाट के पास तीन एकड़ में बनाए गए भवन में मरीजों को सभी प्रकार की सुविधाएँ और शुध्द पर्यावरण उपलब्ध हैं।


विपरीत हालात में भी हौसले के साथ आगे बढ़ते रहने के कारण ही विराट हॉस्पिस ने विजेता के भाव से कठिनतम लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा दिए ।


यह निरंतर जारी रहने वाली ऐसी यात्रा है जो कठिनतम रास्तों से गुजरती है लेकिन इसमें थककर बैठ जाने की कोई गुंजाइश नहीं है।


इस सेवाकार्य में आपका सहयोग हमारे लिए अत्यंत उपयोगी है लेकिन केवल धन नहीं अपितु मानसिक समर्पण कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।


पीड़ित मानवता की निःस्वार्थ सेवा के इस अनुष्ठान में सहभागी बनने आप सादर आमन्त्रित हैं।

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