कठिन कार्य भी सरलता से हो जाते हैं यदि उसके पीछे की भावना पवित्र हो

" Difficult works also become easier if intention behind that is holy."



अभिप्राय ये है कि परोपकार करते समय आने वाली कठिनाइयों की चिंता नहीं करनी चाहिए । मन में कोई निहित स्वार्थ न हो तो ईश्वर अदृश्य रहकर भी सेवा करने वाले की मदद करते हैं। यही वजह है कि भावना की पवित्रता सर्वोच्च आवश्यकता होती है।


इस भाव को कार्य रूप में बदलते हुए मप्र के जबलपुर नगर में कैंसर की आखिरी स्थिति में पहुंच चुके मरीजों की जीवनपर्यन्त देखभाल करने का एक अनूठा प्रयास किया गया।


वर्ष 2013 में अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन ब्रह्मर्षि विश्वात्मा बावरा जी महाराज की प्रेरणा से साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने जिस विराट हॉस्पिस नामक संस्थान की स्थापना की वह इसका जीवंत प्रतीक है।


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