दूसरों का मूल्यांकन करना सदैव दुख का कारण बनता है

" Evaluation of others always give sadness. Hence , if you want to remain happy then look at yourself . "



सरल शब्दों में बहुत ही श्रेष्ठ बात कही गई है उक्त सन्देश में । साधारणतः ये दिखाई देता है कि लोग अपने दोष दूर करने की जगह दूसरों की गलतियां ढूंढने में समय गंवाते है।


जबकि सत्य ये है कि स्वयं को सुधारने की प्रवृत्ति रखने वाला व्यक्ति ही सदैव प्रसन्न और संतुष्ट रहता है।

उक्त विचार का आशय ये है कि व्यक्ति को अपने भीतर झाँककर जीवन को सही दिशा देनी चाहिए क्योंकि इससे जो आत्मिक आनन्द प्राप्त होता है वह दूसरों से अपेक्षा करने में नहीं मिल सकता।


6 साल पहले जबलपर (मप्र) में साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने उक्त विचार को विराट हॉस्पिस नामक संस्थान की स्थापना कर कार्यरूप में बदला।



एक कैंसर पीड़ित आदिवासी युवती को हुए कष्ट को देखकर कैंसर की अंतिम अवस्था में आने के बाद असहाय और हताश हो जाने वाले मरीजों की निःस्वार्थ देखभाल करने का केन्द्र स्थापित करने हेतु वे प्रेरित हुईं। जिसके पीछे उनके ब्रह्मलीन गुरुदेव ब्रह्मर्षि विश्वात्मा बावरा जी महाराज की वह शिक्षा थी कि पीड़ित मानवता की सेवा ही जीवन का सर्वश्रेष्ठ कार्य है जिसे हमें खुद होकर करना चाहिए।


ऐसे अवसरों पर समाज के अन्य लोगों में सेवाभावना की कमी पर सवाल उठाए जाने का चलन है लेकिन विराट हॉस्पिस ने आत्मावलोकन पर जोर देते हुए अपेक्षा की बजाय स्वयं होकर काम करने पर बल दिया।


दीदी के प्रेरणादायी नेतृत्व में ऐसे लोग जुटने लगे जो अपनी योग्यता का मूल्यांकन करते हुए गलतियों से सीखने की प्रवृत्ति से सम्पन्न थे।

कैंसर की अंतिम अवस्था जानलेवा होती है।

ऐसे मरीजों की मृत्यु सुनिश्चित है। विराट हॉस्पिस की शुरुवात के पहले ये बात भी उठी कि जिन्हें आज नहीं तो कल मरना ही है उनके लिए समय,शक्ति और संसाधन खर्च करने से क्या लाभ?


लेकिन धुन की पक्की दीदी ने अपने उद्देश्य में दृढ विश्वास व्यक्त करते हुए पूर्ण समर्पण के भाव से कदम आगे बढ़ाए और धीरे - धीरे ही सही लेकिन विराट हॉस्पिस की उपयोगिता और सार्थकता को जबलपुर और मप्र ही नहीं अपितु देश और दुनिया भर में प्रशंसा और प्रसिद्धि प्राप्त हो रही है।


सबसे बड़ी बात ये है कि विराट हॉस्पिस बिना सरकारी अनुदान लिए चलता है।

समाज के सज्जन लोग इसे संचालित कर रहे हैं।


वर्तमान में यहां 28 बिस्तर हैं।

मरीज एक परिजन के साथ जीवन की अतिम सांस तक यहां रह सकता है। दोनों के लिए भोजन और आवास सहित पारिवारिक वातावरण उपलब्ध है।उसे हर वक़्त नर्सिंग सुविधा दी जाती है वहीं डाक्टरी परामर्श के साथ दवाएं भी उपलब्ध रहती हैं।उक्त सभी सुविधाएं निःशुल्क हैं।


अब तक लगभग 1050 मरीज इसकी सेवाएं ले चुके हैं।


भेड़ाघाट के निकट गोपालपुर ग्राम में जनसहयोग से तीन एकड़ भूमि खरीदकर उस पर विराट हॉस्पिस का एक सर्वसुविधाजनक परिसर निर्मित किया गया है । जिसका प्राकृतिक वातावरण मरीज़ों के लिए अत्यन्त आनन्ददायक है ।


निकट भविष्य में यहां 48 बिस्तरों का प्रबंध कर लिया जावेगा । इसके अलावा कैंसर

मरीजों को रेडिएशन की सुविधा भी दी जावेगी।


विराट हॉस्पिस की कल्पना उन सेवाभावी सज्जनों की मदद से आगे बढ़ सकी जो दूसरों की आलोचना करने की बजाय खुद में सुधार करने की इच्छाशक्ति रखते हैं।


यदि आप अपने जीवन में प्रसन्नता का समावेश करना चाहें तो आइये विराट हॉस्पिस की इस कोशिश का हिस्सा बनिये जो आपको असीम मानसिक शान्ति और अमूल्य संतोष प्रदान करेगा।

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