किसी की मदद के लिए अनुकूल स्थिति के इंतज़ार में समय नष्ट नहीं करें

" For helping others don't waste time waiting for the favorable condition."


कामयाबी नहीं मिलने का मतलब ये नहीं कि विकल्प समाप्त हो गए परंतु इसके लिए निठल्ले बैठे रहने की बजाय मेहनत करनी पड़ती है और परिणामस्वरूप विपरीत स्थिति भी अनुकूल बन जाती है।


जबलपुर (मप्र) स्थित विराट हॉस्पिस नामक संस्थान भी ऐसी ही कोशिश है जहां अनुकूल परिस्थितियों की राह देखने के बजाय मौजूदा हालातों को ही अनुकूल बनाने का अनुष्ठान जारी है।



अप्रैल 2013 में ब्रह्मर्षि मिशन समिति के अंतर्गत इसकी स्थापना साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी द्वारा की गयी। उनके ब्रह्मलीन गुरुदेव ब्रह्मर्षि विश्वात्मा स्वामी बावरा जी महाराज इसके प्रेरणास्रोत थे ।


उन कैंसर मरीजों को जिनकी जीवन यात्रा अंतिम चरण में आ चुकी है, समुचित इलाज,दवाईयां और एक परिजन सहित भोजन और आवास की सुविधा विराट हॉस्पिस में पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध है ।


बिना सरकारी अनुदान के समाज की मदद से चल रहे विराट हॉस्पिस में वर्तमान में 28 बिस्तरों की व्यवस्था है।


अब तक 1040 से अधिक कैंसर मरीज विराट हॉस्पिस के सान्निध्य में अपना अंतिम समय शांति के साथ गुजार चुके हैं।


इसे विकसित स्वरूप प्रदान करते हुए जनसहयोग से 3 एकड़ भूमि खरीदकर एक सर्वसुविधायुक्त भवन का निर्माण किया गया है। भेड़ाघाट के समीप गोपालपुर ग्राम में स्थित विराट हास्पिस का नवीन परिसर शुद्ध वातावरण के कारण मरीजों को बेहद रास आ रहा है। इस परिसर में 48 मरीजों को एक परिजन सहित रखे जाने की व्यवस्था भी निकट भविष्य में की जाएगी। रेडिएशन सुविधा भी उपलब्ध कराई जावेगी ।


वस्तुतः यह सेवा कार्य ईश्वरीय विधान जैसा है जिसमें ठहराव या विश्राम की गुंजाइश नहीं है। आपसे भी निवेदन है इस पुण्य कार्य में सहयोगी बनें जिससे मिलने वाला संतोष किसी तपस्या के फल से कम नहीं होता।

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