सत्य को जानने वाले तो बहुत हैं लेकिन उसके समर्थन में खड़े होने वाले कम होते हैं।

Updated: Mar 7, 2019

" सत्य को जानने वाले तो बहुत हैं लेकिन उसके समर्थन में खड़े होने वाले कम होते हैं।"


" There are lot of people who know the Truth but very few who stand in support of that."


दरअसल यही जीवन की वास्तविकता है जिसे स्वीकार करने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है।


सच को जानने की उत्सुकता मनुष्य की प्रकृति है लेकिन सच्चाई का समर्थन करने वाले मुट्ठी भर होते हैं।


प्रमाणित सत्य है कि कैंसर प्राणघातक बीमारी है। शुरुवात में तो आजकल इलाज सम्भव भी है लेकिन अंतिम अवस्था में मरीज जीवित लाश बनकर रह जाता।

अस्पताल में भी उसे राहत नहीं मिलती और घर में उचित देखभाल लगभग नामुमकिन होती है।


ऐसे मरीजों की स्थिति को जान लेना सत्य को समझने जैसा ही है किन्तु ज़िंदगी के अंतिम समय में उनके दर्द को बांटने की प्रतिबद्धता दिखाना बेहद कठिन हो जाता है।


मप्र के जबलपुर नगर में छह साल पूर्व शुरू हुए विराट हॉस्पिस नामक संस्थान ने सत्य को जानने के बाद उसके साथ खड़े होने की पहल भी की जो एक उदाहरण के रूप में देश-विदेश में चर्चित है।


ब्रह्मर्षि मिशन समिति के संयोजकत्व में साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने कैंसर की अंतिम अवस्था के मरणासन्न मरीजों के साथ रहकर उनके दर्द में साझेदारी का अभिनव प्रयास शुरू किया। प्रख्यात शल्य चिकित्सक डॉ अखिलेश गुमाश्ता ने उनके साथ इस संस्थान के चिकित्सा निदेशक का दायित्व निःस्वार्थ भाव से ग्रहण किया ।


प्रारम्भ में उपहास और उपेक्षा का शिकार हुए विराट हॉस्पिस ने छह वर्ष के भीतर वह कर दिखाया जो साधारणतः सोच की सीमा से बाहर है। अब तक 1000 से ज्यादा मरीज इसकी सेवाएं ले चुके हैं।


इस व्यवस्था में मरीजों को 24 घण्टे नर्सिंग, डाक्टरी परामर्श,दवा,जरूरी चिकित्सा के अलावा एक परिजन के साथ अंतिम सांस तक आवास एवं भोजन की सुविधा है।

किसी भी सेवा या सुविधा के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता।


विराट हॉस्पिस सरकारी सहायता नहीं लेता। इसका संचालन सामाजिक सहयोग से होता है।


यहां मरीजों को पारिवारिक वातावरण, आध्यात्मिक सत्संग के साथ ही स्वस्थ मनोरंजन द्वारा मृत्यु के भय से मुक्त रखते हुए उमंग,उत्साह और उत्सव की मानसिकता में जीने हेतु प्रेरित तथा प्रोत्साहित किया जाता है।


इसे अत्याधुनिक बनाने हेतु भेड़ाघाट के निकट गोपालपुर ग्राम में जन सहयोग से तीन एकड़ भूमि पर सर्वसुविधायुक्त भवन तैयार किया गया है। 28 बिस्तरों की क्षमता वाले इस भवन में आकर मरीज बेहद खुश हैं क्योंकि यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और शुद्ध पर्यावरण उन्हें काफी रास आ रहा है।


शीघ्र ही इसमें 48 बिस्तरों की व्यवस्था के साथ ही रेडियेशन की सुविधा भी उपलब्ध होगी ।


विराट हॉस्पिस सभी विकल्पों के समाप्त होने के बाद मानवीय संकल्प के उदय होने की अवधारणा को साबित कर रहा है।


यह एक तपस्या है शून्य से शिखर को छूने की जिसमें निःस्वार्थ भाव और निरंतरता आवश्यक है।


जो भी महानुभाव सत्य का ज्ञान हो जाने के उपरान्त उसके हमकदम चलने की इच्छाशक्ति रखते हों वे विराट हॉस्पिस रूपी अनुष्ठान में सहभागिता दें ये विनम्र प्रार्थना है। लेकिन आपका मानसिक समर्पण सर्वाधिक जरूरी होगा।


उम्मीद है आप पीड़ित मानवता की सेवा के इस ईश्वरीय कार्य के साथ जुड़कर अपनी संवेदनशीलता का परिचय देंगे।


आपका समय सुख शान्ति से व्यतीत हो यही कामना है।

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