बाधाएँ तो सफर का हिस्सा हैं

" बाधाएँ तो सफर का हिस्सा हैं । जो उन्हें पार कर लेते हैं वे ही सफलता रूपी मंज़िल तक पहुंचते हैं।"


" Obstacles are the part of Journey. Only those who cross them , reach the destination named success."



बहुत ही व्यवहारिक सलाह है । जो भी इसे समझ लेते हैं उनके लिए मंजिल तक पहुंचना सरल हो जाता है।


अक्सर देखने में आता है कि बहुतेरे लोग समस्याओं को लेकर दुखी रहते हैं लेकिन वे इस तथ्य को उपेक्षित कर देते हैं कि ये उनके धैर्य और सामर्थ्य की परीक्षा है ।


इसी सत्य को अपनाते हुए छह वर्ष पूर्व मप्र के जबलपुर नगर में एक अनुष्ठान प्रारम्भ हुआ। जिसका उद्देश्य कैंसर के उन मरीजों की निःस्वार्थ सेवा करना है जिनकी बीमारी लाइलाज मानकर चिकित्सक भी हाथ खड़े कर देते हैं।


विराट हॉस्पिस नामक इस संस्थान में अन्तिम अवस्था के कैंसर मरीजों को आखिरी क्षण तक परिवार के सदस्य जैसे रखते हुए उनका दर्द बांटकर प्रसन्नता का वातावरण उन्हें दिया जाता है।


ये जानते हुए भी कि उनकी जीवन रक्षा असम्भव है , फिर भी जितनी साँसें उन मरीजों की शेष हैं उनमें उन्हें अधिकतम सुख -सुविधा देते हुए अंत को कम से कम कष्टपूर्ण बनाना विराट हॉस्पिस की कार्य शैली है।


इसमें फिलहाल 28 मरीजों को रखे जाने का प्रबन्ध है।


मरीजों की 24 घण्टे प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ द्वारा सेवा सुश्रुषा के साथ ही आवश्यक दवाइयां, डाक्टरी सलाह और एक सहयोगी के साथ भोजन और आवास की निःशुल्क व्यवस्था है।


विराट हॉस्पिस बिना सरकारी मदद लिए पूरी तरह जनसहयोग से संचालित संस्था है।


सुप्रसिद्ध धुआंधार जलप्रपात के समीप गोपालपुर ग्राम में जनसहयोग से तीन एकड़ भूमि खरीदकर संस्थान के एक भव्य परिसर का निर्माण किया गया है। अतिशीघ्र इसकी क्षमता बढ़ाकर 48 बिस्तरों की किये जाने के साथ ही रेडियेशन सुविधा भी उपलब्ध करवाई जावेगी ।


प्रकृति के सन्निकट आने से मरीजों की मनःस्थिति में जो सकारात्मक बदलाव नजर आया वह एक सुखद अनुभव है।


विराट हास्पिस ने समस्या को जीवन रूपी यात्रा का हिस्सा मानकर निःस्वार्थ सेवा का समाधान के तौर पर उपयोग किया और अब तक 1040 से ज्यादा मरीजों की अंतिम सांस तक देखभाल कर ये साबित कर दिखाया कि समस्या का सामना किस तरह किया जा सकता है।


मृत्यु के कगार पर बैठे इन हताश मरीजों को मानसिक सम्बल देते हुए उनके आंसू पोंछने का प्रयास समस्या का सामना करने के साथ ही एक तपस्या भी है।


जो भी सेवाभावी सज्जन इस प्रकल्प से जुड़कर पीड़ित मानवता की निःस्वार्थ सेवा करना चाहें उनका विराट हॉस्पिस में स्वागत है ।


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