वही सेवा सार्थक होती है जिसमें निजी स्वार्थ की कामना न हो

" The service which has no intention of any return is meaningful."



भारतीय आध्यात्म में परोपकार को श्रेष्ठतम कार्य कहा गया है लेकिन उसकी सार्थकता तभी है जब उसके साथ किसी तरह का कोई निजी हित न जुड़ा हो। सच्चाई ये है कि स्वार्थपूर्ण नेकी व्यवसाय की श्रेणी में आती है ।


लेकिन निःस्वार्थ सेवा के उद्देश्य से कार्य करने वाले आत्मिक सुख की उस चरम अवस्था तक पहुंच सकते हैं जो बड़े-बड़े पुण्यात्माओं के लिए भी दुर्लभ है ।


इसी भाव से प्रेरित होकर जबलपुर (मप्र) नगर में निःस्वार्थ सेवा का ऐसा अनुष्ठान प्रारम्भ किया गया जो कल्पनातीत था ।


कैंसर जैसी बीमारी के मरीजों की पीड़ा को महसूस करते हुए उनका मनोबल ऊंचा उठाने का कार्य इस प्रकल्प में हो रहा है ।


खास तौर पर से जब वे बीमारी की अंतिम अवस्था में आ चुके हों और उनके पास सिवाय मृत्यु का इंतज़ार करने के और कोई विकल्प नहीं बच रहता।


असहनीय दर्द और तनाव की उस स्थिति में परिवारजनों के लिए भी अपने प्रिय स्वजन की सेवा-सुश्रुषा एक समस्या बन जाती है।


ऐसे मरीजों को पारिवारिक माहौल में रखकर अंतिम सांस तक देखभाल करते हुए उनके शेष जीवन को कष्टरहित बनाने जैसा कार्य हाथ में लिया विराट हॉस्पिस नामक एक स्वयंसेवी संस्थान ने जिसकी परिकल्पना को साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने साकार कर दिखाया।


स्वार्थरहित मानवता की सेवा के प्रति समर्पण का भाव उन्हें अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन ब्रह्मर्षि विश्वात्मा बावरा जी महाराज से प्राप्त हुआ था ।


विराट हॉस्पिस का संचालन बिना संसाधनों के कठिन था लेकिन दीदी के मन में परमार्थ की भावना होने से वह सफलता की सीढ़ियां चढ़ता चला गया ।


बिना सरकारी मदद के विराट हॉस्पिस ने अपनी स्थापना के 6 वर्ष के भीतर 1040 से ज्यादा कैंसर मरीजों की निःस्वार्थ सेवा कर परोपकार शब्द को सार्थक सिद्ध कर दिखाया ।


विराट हॉस्पिस में मरीजों को हर समय नर्सिंग सेवा के साथ दवाइयां, डाक्टरी जाँच, आदि की भी सुविधा दी जाती है।

मरीज के साथ एक परिजन या किसी सहयोगी को भी आवास एवं भोजन प्रदान किया जाता है। ये सभी व्यवस्थाएं पूर्णतः निःशुल्क हैं।


भेड़ाघाट के निकट गोपालपुर ग्राम में विराट हॉस्पिस के नवनिर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त भवन में 28 बिस्तरों की वर्तमान व्यवस्था को बढ़ाकर 48 तक किया जा रहा है । साथ ही रेडिएशन सुविधा भी उपलब्ध कराई जावेगी।


प्रकृति के सान्निध्य में स्थित यह नवीन परिसर मरीजों को मानसिक रूप से आनंदित करने वाला साबित हो रहा है।


विराट हॉस्पिस ने बीते छह वर्ष में बिना किसी कामना के जिस तरह कैंसर रोगियों की सेवा की वह समाज के लिए एक उदाहरण बन गया ।


इस संस्थान में उन लोगों के सहयोग की सदैव जरूरत रहती है जो निःस्वार्थ सेवा को जीवन का लक्ष्य बना लेते हैं।


विराट हॉस्पिस में ऐसे महानुभावों का सदैव स्वागत है।

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