आपका उद्देश्य और हालात दूसरों से अलग हो सकते हैं अतःअपनी राह खुद चुनिए

" Your aim and circumstances may be different from others hence always choose your own path."



उक्त कथन में सन्देश मात्र इतना है कि भीड़ के पीछे बिना सोचे चलते रहने के बजाय हर किसी को विचारपूर्वक अपनी दिशा निश्चित करनी चाहिए क्योंकि सभी के जीवन का लक्ष्य और उसे प्राप्त करने की विधि एक समान हों ये जरूरी नहीं है।


जो भी ये बात भली-भांति समझ जाता है वह आश्चर्यजनक कार्य करने में सफल हो जाता है।


इसी सोच से सवाल उठा कि कैंसर की आख़िरी अवस्था के मरीजों को रखकर उनकी देखभाल करने का विचार कहां तक सार्थक है ? और तब इसके उत्तर स्वरूप बतौर निष्कर्ष ये समझ में आया कि :-

" जहां सारे विकल्प समाप्त हो जाते हैं वहां मानवीय संकल्प का उदय होता है।"


मप्र के जबलपुर, नगर में 6 वर्ष पूर्व लीक से हटकर ऐसा संकल्प लिया गया जो न सहज था और न ही स्वाभाविक।


कैंसर की अंतिम अवस्था के मरीजों को बेमौत मरने के लिए छोड़ देने की प्रवृत्ति को दरकिनार कर उन्हें उम्मीद और हौसला देने हेतु विराट हॉस्पिस नामक एक संस्थान का गठन किया गया।


इसकी स्थापना साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी द्वारा अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मर्षि स्वामी विश्वात्मा बावरा जी महाराज की दिव्य प्रेरणा से की गई जिसमें पहले दिन से से ही प्रख्यात शल्य चिकित्सक निःस्वार्थ समाजसेवी डा. अखिलेश गुमाश्ता का सहयोग निरन्तर और नियमित प्राप्त हो रहा है।


अंतिम अवस्था में जब कैंसर मरीज की जीवन रक्षा असम्भव मान ली जाती है तब भी विराट हॉस्पिस उनमें आत्मविश्वास जगाने का काम करता है ताकि उसकी शेष ज़िंदगी अधिकतम खुशनुमा बन सके।


प्रारम्भ से ही इसका संचालन बिना शासकीय मदद लिए समाज के सहयोग से हो रहा है।


विराट हॉस्पिस द्वारा अब तक 1040 से अधिक मरीजों को सेवा प्रदान की जा चुकी है।


यहां मरीजों के लिए 24 घंटे प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवाएं,डाक्टरी परामर्श और जरूरी दवाऐं भी उपलब्ध रहती हैं।एक सहयोगी सहित भोजन एवं आवास भी प्रदान किया जाता है।


28 मरीजों की वर्तमान क्षमता वाले विराट हॉस्पिस में उक्त सभी सुविधाएं निःशुल्क हैं।

शीघ्र ही इसकी क्षमता बढाकर 48 बिस्तरों तक कर दी जावेगी । साथ ही रेडियेशन सुविधा भी उपलब्ध कराई जावेगी।


विराट हास्पिस अस्पताल से अलग एक ऎसा सेवा केंद्र है जहां पारिवारिक माहौल में निःस्वार्थ सेवा के जरिये मरीज के मन से मृत्यु का भय दूर कर उन्हें उमंग , उत्साह और उत्सव का माहौल प्रदान किया जाता है।


इसका नवनिर्मित भवन जनसहयोग से 3 एकड़ भूमि पर बनकर तैयार हो गया है। भेड़ाघाट के निकट गोपालपुर ग्राम में स्थित यह नवीन परिसर शुद्ध पर्यावरण के कारण मरीजों को बेहद रुचिकर प्रतीत हो रहा है।


जो भी सज्जन भेड़चाल से अलग हटकर सेवा के पवित्र मार्ग पर चलने के उत्सुक हों वे विराट हॉस्पिस की इस यात्रा में हमारे साथ चलकर अपने जीवन को सही दिशा दे सकते हैं।


आपका साहचर्य हमें अवश्य प्राप्त हो सकेगा इस विश्वास के साथ,

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